रोहतक से निकलने की चार बार कोशिश कर चुके, अब हम कहां जाएं। जहां काम करते थे, वहां से निकाल दिए गए। किसी ने कहा, सरकार ने बसों का इंतजाम किया है दिल्ली से। हम 72 घंटे में चार बार प्रयास कर चुके हैं दिल्ली जाने के। बीच रास्ते में से पुलिस वापस दौड़ा देती है। हम तो पढ़े-लिखे हैं नहीं, किसी से पूछ लेते हैं।
वे बोलते हैं, सरकार जरूर ले जाएगी, तुम जाओ। हम दिन देखते न रात, बस महिला और बच्चों को लेकर निकल पड़ते हैं। अभी रात के दस (29 मार्च) बजे हैं, हम दिल्ली रोड पर करीब 20 किलोमीटर पैदल निकल गए थे। वहां सांपला कस्बे में पुलिस वाले बोले, वापस रोहतक चले जाओ। सरकार ने अब नया नियम बना दिया है।
सरकार ने कहा है, अब किसी को कहीं नहीं जाने देना। अगर कोई जबरन कहीं जाता है तो उसे पकड़ कर 14 दिन के लिए अलग कमरे में बैठा दो। ऐसे में क्या करते, सिर पर सामान और गोदी में बच्चे लिए वापस बीस किलोमीटर पैदल चलकर रोहतक पहुंच गए।
ये दास्तां है कि झांसी से आगे ललितपुर जिले के माडवॉड ब्लॉक के हनुमतगढ़ गांव निवासी चतरा की। रात के दस बजे थे, वे रोहतक में राजीव गांधी स्टेडियम के सामने सड़क पर बैठे हुए थे। सड़क पर साफ सफाई थी, लिहाजा उन्हें रात बिताने के लिए यही जगह ठीक लगी। वहां कई समूहों में दूसरे मजदूर भी थे।
ये सभी रोहतक से दिल्ली रोड पर बीस किलोमीटर दूर स्थित सांपला कस्बे से वापस लौटे हैं। चतरा पूछते हैं, बाबू जी, क्या करें, कहां जाएं और किसकी मानें। सरकार कब क्या कह रही है, हमें तो पता नहीं चलता। अपने जानकारों से पूछते हैं तो वे बता देते हैं। एक बात तो है जी, सरकार का पक्का कुछ भी नहीं है।कब
क्या कह दे, मालूम नहीं। पहले कहा गया कि हम लोगों को यूपी बिहार और मध्यप्रदेश बॉर्डर तक छोड़ने का इंतजाम किया गया है। हमने चार बार दिल्ली जाने की कोशिश की मगर नहीं जा पाए।
चतरा के साथ बैठे राम बाबू कहते हैं कि साहब जी, कोई हमें सच तो बताए कि सरकार चाह क्या रही है। अभी-अभी किसी ने बताया कि अब कोई नहीं जाएगा, ये आदेश जारी हुआ है। अगर कोई कहीं जाता हुआ मिला तो उसे पकड़ कर 14 दिन के लिए किसी अलग कमरे में बंद कर देंगे।
आप देख लें, हमारे साथ ये महिलाएं और बच्चे हैं। कहां जाएंगे और क्या खाएंगे। हालांकि वहां मौजूद स्थानीय लोगों ने कुछ ही देर बाद उनके खाने पीने का इंतजाम कर दिया। मेयर मनमोहन गोयल ने उनके लिए खाना भेजा।
इसी तरह शहर में हजारों दूसरे मजदूर भी हैं जो सरकार के भ्रम का शिकार होकर सड़कों पर भटक रहे हैं।
वे बोलते हैं, सरकार जरूर ले जाएगी, तुम जाओ। हम दिन देखते न रात, बस महिला और बच्चों को लेकर निकल पड़ते हैं। अभी रात के दस (29 मार्च) बजे हैं, हम दिल्ली रोड पर करीब 20 किलोमीटर पैदल निकल गए थे। वहां सांपला कस्बे में पुलिस वाले बोले, वापस रोहतक चले जाओ। सरकार ने अब नया नियम बना दिया है।
सरकार ने कहा है, अब किसी को कहीं नहीं जाने देना। अगर कोई जबरन कहीं जाता है तो उसे पकड़ कर 14 दिन के लिए अलग कमरे में बैठा दो। ऐसे में क्या करते, सिर पर सामान और गोदी में बच्चे लिए वापस बीस किलोमीटर पैदल चलकर रोहतक पहुंच गए।
ये दास्तां है कि झांसी से आगे ललितपुर जिले के माडवॉड ब्लॉक के हनुमतगढ़ गांव निवासी चतरा की। रात के दस बजे थे, वे रोहतक में राजीव गांधी स्टेडियम के सामने सड़क पर बैठे हुए थे। सड़क पर साफ सफाई थी, लिहाजा उन्हें रात बिताने के लिए यही जगह ठीक लगी। वहां कई समूहों में दूसरे मजदूर भी थे।
ये सभी रोहतक से दिल्ली रोड पर बीस किलोमीटर दूर स्थित सांपला कस्बे से वापस लौटे हैं। चतरा पूछते हैं, बाबू जी, क्या करें, कहां जाएं और किसकी मानें। सरकार कब क्या कह रही है, हमें तो पता नहीं चलता। अपने जानकारों से पूछते हैं तो वे बता देते हैं। एक बात तो है जी, सरकार का पक्का कुछ भी नहीं है।कब
क्या कह दे, मालूम नहीं। पहले कहा गया कि हम लोगों को यूपी बिहार और मध्यप्रदेश बॉर्डर तक छोड़ने का इंतजाम किया गया है। हमने चार बार दिल्ली जाने की कोशिश की मगर नहीं जा पाए।
चतरा के साथ बैठे राम बाबू कहते हैं कि साहब जी, कोई हमें सच तो बताए कि सरकार चाह क्या रही है। अभी-अभी किसी ने बताया कि अब कोई नहीं जाएगा, ये आदेश जारी हुआ है। अगर कोई कहीं जाता हुआ मिला तो उसे पकड़ कर 14 दिन के लिए किसी अलग कमरे में बंद कर देंगे।
आप देख लें, हमारे साथ ये महिलाएं और बच्चे हैं। कहां जाएंगे और क्या खाएंगे। हालांकि वहां मौजूद स्थानीय लोगों ने कुछ ही देर बाद उनके खाने पीने का इंतजाम कर दिया। मेयर मनमोहन गोयल ने उनके लिए खाना भेजा।
इसी तरह शहर में हजारों दूसरे मजदूर भी हैं जो सरकार के भ्रम का शिकार होकर सड़कों पर भटक रहे हैं।
प्रवासी मजदूरों के लिए हरियाणा सरकार के ये इंतजाम
हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला का कहना है कि हम किसी भी प्रवासी मजदूर को सड़क पर नहीं रहने देंगे। उनके खाने-पीने और रहने का इंतजाम किया जाएगा। यहां काम करने वाले मजदूर जो उत्तर प्रदेश, बिहार या किसी दूसरे राज्य की ओर पैदल जा रहे थे, उनके ठहरने के लिए हर जिले में इंतजाम किया गया है। प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में मजदूरों को ठहराया जा रहा है।
पंचायती भवनों एवं दूसरी सरकारी बिल्डिंगों को भी शेल्टर होम के रूप में बदला जा रहा है। ऐसे सभी भवनों को सैनिटाइज किया जा रहा है।कई लोग एकत्रित न हो पाएं और सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे, इसका खास ध्यान रखा गया है।
मुख्यमंत्री खट्टर ने भी सभी जिला उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे मजदूरों को कहीं दूसरी जगह पर न जाने दें। लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराएं। हर जिले में शेल्टर कैंप बना दिए जाएं। मजदूरों के रहने और खाने-पीने की पूर्ण व्यवस्था की जाए। यदि इसके बाद भी कोई मजदूर कहीं दूसरी जाने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
पंचायती भवनों एवं दूसरी सरकारी बिल्डिंगों को भी शेल्टर होम के रूप में बदला जा रहा है। ऐसे सभी भवनों को सैनिटाइज किया जा रहा है।कई लोग एकत्रित न हो पाएं और सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे, इसका खास ध्यान रखा गया है।
मुख्यमंत्री खट्टर ने भी सभी जिला उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे मजदूरों को कहीं दूसरी जगह पर न जाने दें। लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराएं। हर जिले में शेल्टर कैंप बना दिए जाएं। मजदूरों के रहने और खाने-पीने की पूर्ण व्यवस्था की जाए। यदि इसके बाद भी कोई मजदूर कहीं दूसरी जाने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।